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mahabharat 6.60.21: भीष्म का ध्वज ऊँचा था और उस पर पाँच ताड़ के वृक्ष अंकित थे। उनके रथ में उत्तम घोड़े जुते हुए थे, जिनकी गति के कारण रथ अत्यंत शक्तिशाली प्रतीत होता था। उस पर सवार होकर शान्तनुपुत्र भीष्म ने बाणों की चमक और अशनि जैसे महान दिव्यास्त्रों से प्रकाशित अर्जुन पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.21 
तं पञ्चतालोच्छ्रिततालकेतु:
सदश्ववेगाद्भुतवीर्ययान:।
महास्त्रबाणाशनिदीप्तिमन्तं
किरीटिनं शान्तनवोऽभ्यधावत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भीष्म का ध्वज ऊँचा था और उस पर पाँच ताड़ के वृक्ष अंकित थे। उनके रथ में उत्तम घोड़े जुते हुए थे, जिनकी गति के कारण रथ अत्यंत शक्तिशाली प्रतीत होता था। उस पर सवार होकर शान्तनुपुत्र भीष्म ने बाणों की चमक और अशनि जैसे महान दिव्यास्त्रों से प्रकाशित अर्जुन पर आक्रमण किया।
 
Bhishma's flag was high and marked with five palm trees. His chariot was drawn by good horses, whose speed made the chariot seem extremely powerful. Riding on it, Shantanu's son Bhishma attacked Arjuna, who was radiant with the brilliance of arrows and great divine weapons like Ashani.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)