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mahabharat 6.60.18: हाथियों के दाँतों और सूँडों के प्रहार से उनके रथ चकनाचूर हो जाने के कारण अनेक रथी अपने सारथियों सहित भूमि पर गिर पड़े। अनेक श्रेष्ठ रथियों ने अपने बाणों से उन बड़े-बड़े हाथियों को घायल करके नीचे गिरा दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.18 
गजैर्विषाणैर्वरहस्तरुग्णा:
केचित् ससूता रथिन: प्रपेतु:।
गजर्षभाश्चापि रथर्षभेण
निपातिता बाणहता: पृथिव्याम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हाथियों के दाँतों और सूँडों के प्रहार से उनके रथ चकनाचूर हो जाने के कारण अनेक रथी अपने सारथियों सहित भूमि पर गिर पड़े। अनेक श्रेष्ठ रथियों ने अपने बाणों से उन बड़े-बड़े हाथियों को घायल करके नीचे गिरा दिया।
 
Many charioteers fell to the ground along with their charioteers because their chariots were shattered by the blows of the elephants' tusks and trunks. Many excellent charioteers struck the big elephants with their arrows and brought them down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)