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mahabharat 6.60.14: क्षण भर में ही शंखों की ध्वनि ने भेरी और पणव आदि की ध्वनि को दबा दिया और शंखों की ध्वनि से व्याप्त आकाश पृथ्वी से उठी हुई धूल के भयानक और अद्भुत जाल के समान फैल गया॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.60.14 
क्षणेन भेरीपणवप्रणादा-
नन्तर्दधु: शङ्खमहास्वनाश्च।
तच्छङ्खशब्दावृतमन्तरिक्ष-
मुद्‍धूतभीमाद्भुतरेणुजालम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
क्षण भर में ही शंखों की ध्वनि ने भेरी और पणव आदि की ध्वनि को दबा दिया और शंखों की ध्वनि से व्याप्त आकाश पृथ्वी से उठी हुई धूल के भयानक और अद्भुत जाल के समान फैल गया॥14॥
 
In a moment the sound of the conches drowned out the sounds of the bheri and the panava etc., and the sky pervaded by the sound of the conches was spread like a dreadful and wonderful web of dust raised from the earth.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)