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mahabharat 6.60.11: यह उस व्यूह रचना के समान थी जो महान कुरुराज धर्मराज युधिष्ठिर ने प्रथम दिन बनाई थी। इस पृथ्वी पर मानव सेनाओं में ऐसी व्यूह रचना पहले कभी न देखी गई थी, न सुनी गई थी। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.60.11 
यथा हि पूर्वेऽहनि धर्मराज्ञा
व्यूह: कृत: कौरवसत्तमेन।
तथा न भूतो भुवि मानुषेषु
न दृष्टपूर्वो न च संश्रुतश्च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यह उस व्यूह रचना के समान थी जो महान कुरुराज धर्मराज युधिष्ठिर ने प्रथम दिन बनाई थी। इस पृथ्वी पर मानव सेनाओं में ऐसी व्यूह रचना पहले कभी न देखी गई थी, न सुनी गई थी। ॥11॥
 
It was similar to the formation made by the great Kuru king Dharmaraja Yudhishthira on the first day. Such a formation had never been seen or heard of before among human armies on this earth. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)