श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  6.59.d2 
संजय उवाच
(इतीदमुक्त्वा स महानुभाव:
सस्मार चक्रं निशितं पुराणम्।
सुदर्शनं चिन्तितमात्रमेव
तस्याग्रहस्तं स्वयमारुरोह॥ )
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - ऐसा कहकर महाबली श्रीकृष्ण को अपने प्राचीन एवं तीक्ष्ण अस्त्र सुदर्शन चक्र का स्मरण हो आया। उसका स्मरण मात्र करते ही वह उनके हाथ की नोक पर प्रकट हो गया।
 
Sanjaya says - Having said this, the great Sri Krishna remembered his ancient and sharp weapon Sudarshana Chakra. Just by thinking about it, it appeared on the tip of his hand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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