Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.59.d1h-31h: भीष्म युद्ध में कंक के पत्तों से अनेक तीखे बाण चला रहे थे। एक ही सीधे पंख वाले बाण से वे लोहे के तीर वाले हाथी को भी छेद सकते थे। जैसे इंद्र अपने वज्र से विशाल पर्वत को छेद देते हैं। | mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म युद्ध में कंक के पत्तों से अनेक तीखे बाण चला रहे थे। एक ही सीधे पंख वाले बाण से वे लोहे के तीर वाले हाथी को भी छेद सकते थे। जैसे इंद्र अपने वज्र से विशाल पर्वत को छेद देते हैं।
Bhishma was scattering a large number of sharp arrows with the leaves of Kanka in the battle. With a single straight feathered arrow he could pierce even an elephant with an iron shaft. Just as Indra pierces a great mountain with his thunderbolt. 30 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥