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mahabharat 6.59.99: यदुवंशके श्रेष्ठ योद्धा भगवान् श्रीकृष्णको मोटी, लम्बी और उत्तम भुजाओंसे आगे आते देखकर अर्जुन भी बड़ी उतावलीसे रथसे कूदकर उनके पीछे दौड़े और निकट जाकर भगवान् की दोनों भुजाएँ पकड़ लीं। अर्जुनकी भुजाएँ भी मोटी और विशाल थीं॥99॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  6.59.99 
रथादवप्लुत्य ततस्त्वरावान्
पार्थोऽप्यनुद्रुत्य यदुप्रवीरम्।
जग्राह पीनोत्तमलम्बबाहुं
बाह्वोर्हरिं व्यायतपीनबाहु:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
यदुवंशके श्रेष्ठ योद्धा भगवान् श्रीकृष्णको मोटी, लम्बी और उत्तम भुजाओंसे आगे आते देखकर अर्जुन भी बड़ी उतावलीसे रथसे कूदकर उनके पीछे दौड़े और निकट जाकर भगवान् की दोनों भुजाएँ पकड़ लीं। अर्जुनकी भुजाएँ भी मोटी और विशाल थीं॥99॥
 
Seeing Lord Krishna, the greatest warrior of the Yadu clan, advancing with thick, long and excellent arms, Arjuna too jumped from the chariot in great haste and ran after him and went close and caught hold of both the arms of the Lord. Arjuna's arms were also thick and huge.॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)