श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  6.59.98 
त्वया हतस्यापि ममाद्य कृष्ण
श्रेय: परस्मिन्निह चैव लोके।
सम्भावितोऽस्म्यन्धकवृष्णिनाथ
लोकैस्त्रिभिर्वीर तवाभियानात्॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
‘श्रीकृष्ण! यदि आज मैं आपके हाथों मारा जाऊँ, तो इस लोक में भी मेरा कल्याण होगा और परलोक में भी। हे अंधक और वृष्णि वंश के वीर रक्षक! आपके इस आक्रमण से तीनों लोकों में मेरी कीर्ति बढ़ गई है।’॥98॥
 
‘Sri Krishna! If I am killed by your hands today, it will be good for me in this world as well as the next. O brave protector of Andhaka and Vrishni clan! This attack of yours has increased my glory in all the three worlds.’॥ 98॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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