Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.59.96-97: उस समय युद्धस्थल में भीष्म के मन में किंचितमात्र भी आसक्ति नहीं थी । उन्होंने सनातन शक्तिमान भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान करते हुए कहा - आओ, आओ, हे देव! जगन्निवास! आपको नमस्कार है । चक्र हाथ में लेकर माधव आये हैं! सबको शरण देने वाले लोकनाथ! आज इस उत्तम रथ द्वारा युद्धस्थल में मुझे बलपूर्वक मार डालो । 96-97॥ | mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय युद्धस्थल में भीष्म के मन में किंचितमात्र भी आसक्ति नहीं थी । उन्होंने सनातन शक्तिमान भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान करते हुए कहा - आओ, आओ, हे देव! जगन्निवास! आपको नमस्कार है । चक्र हाथ में लेकर माधव आये हैं! सबको शरण देने वाले लोकनाथ! आज इस उत्तम रथ द्वारा युद्धस्थल में मुझे बलपूर्वक मार डालो । 96-97॥
At that time, Bhishma did not have even the slightest attachment in his mind at the battlefield. Invoking the eternally powerful Lord Shri Krishna, he said – Come, come, O God! Jagannivas! Greetings to you. Madhav has come with Chakra in his hand! Loknath, who gives shelter to all! Today, kill me forcefully in the battlefield with this excellent chariot. 96-97॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥