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mahabharat 6.59.9: जब योद्धाओं के हथियार स्वर्ण कवच, मुकुट और ध्वजाओं पर टकराते थे, तब उनसे ऐसी भयंकर ध्वनि उत्पन्न होती थी, मानो चट्टानें गिरकर पर्वतों से टकरा रही हों॥9॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.59.9 
काञ्चनेषु तनुत्रेषु किरीटेषु ध्वजेषु च।
शिलानामिव शैलेषु पतितानामभूद् ध्वनि:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब योद्धाओं के हथियार स्वर्ण कवच, मुकुट और ध्वजाओं पर टकराते थे, तब उनसे ऐसी भयंकर ध्वनि उत्पन्न होती थी, मानो चट्टानें गिरकर पर्वतों से टकरा रही हों॥9॥
 
When the weapons of the warriors struck the golden armour, crowns and flags, they produced a terrifying sound, like that of rocks falling and hitting the mountains.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)