श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  6.59.87 
निहत्य सर्वान् धृतराष्ट्रपुत्रां-
स्तत्पक्षिणो ये च नरेन्द्रमुख्या:।
राज्येन राजानमजातशत्रुं
सम्पादयिष्याम्यहमद्य हृष्ट:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र के समस्त पुत्रों तथा उनके पक्ष में आये हुए समस्त महान राजाओं का वध करके आज मैं प्रसन्नतापूर्वक अजातशत्रु राजा युधिष्ठिर को राज्य दे दूँगा।'
 
By killing all the sons of Dhritarashtra and all the great kings who came in his favor, today I will happily give away the kingdom to Ajatashatru king Yudhishthira.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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