vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति
»
श्लोक 8
श्लोक
6.59.8
तिष्ठ स्थितोऽस्मि विद्धॺेनं निवर्तस्व स्थिरो भव।
स्थिरोऽस्मि प्रहरस्वेति शब्दोऽश्रूयत सर्वश:॥ ८॥
अनुवाद
उस समय 'ठहराव रखो, मैं खड़ा हूँ, उसे छेद दो, पीछे मुड़ो, स्थिर रहो, हाँ-हाँ मैं स्थिर हूँ, तुम आक्रमण करो' ये शब्द सर्वत्र सुनाई दे रहे थे।
At that time the words 'Stand firm, I am standing, pierce him, turn back, remain steady, yes-yes I am steady, you attack' were heard everywhere. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×