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mahabharat 6.59.8: उस समय 'ठहराव रखो, मैं खड़ा हूँ, उसे छेद दो, पीछे मुड़ो, स्थिर रहो, हाँ-हाँ मैं स्थिर हूँ, तुम आक्रमण करो' ये शब्द सर्वत्र सुनाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.59.8 
तिष्ठ स्थितोऽस्मि विद्धॺेनं निवर्तस्व स्थिरो भव।
स्थिरोऽस्मि प्रहरस्वेति शब्दोऽश्रूयत सर्वश:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस समय 'ठहराव रखो, मैं खड़ा हूँ, उसे छेद दो, पीछे मुड़ो, स्थिर रहो, हाँ-हाँ मैं स्थिर हूँ, तुम आक्रमण करो' ये शब्द सर्वत्र सुनाई दे रहे थे।
 
At that time the words 'Stand firm, I am standing, pierce him, turn back, remain steady, yes-yes I am steady, you attack' were heard everywhere. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)