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mahabharat 6.59.79: अचानक महान धनुर्धर सात्यकि ने उन सेनाओं के पास पहुंचकर अर्जुन की उसी प्रकार सहायता की, जैसे भगवान विष्णु वृत्र का नाश करने वाले इंद्र की सहायता करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  6.59.79 
स तान्यनीकानि महाधनुष्मा-
ञ्शिनिप्रवीर: सहसाभिपत्य।
चकार साहाय्यमथार्जुनस्य
विष्णुर्यथा वृत्रनिषूदनस्य॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
अचानक महान धनुर्धर सात्यकि ने उन सेनाओं के पास पहुंचकर अर्जुन की उसी प्रकार सहायता की, जैसे भगवान विष्णु वृत्र का नाश करने वाले इंद्र की सहायता करते हैं।
 
Suddenly the great archer Satyaki, reaching near those armies, helped Arjuna in the same way as Lord Vishnu helps Indra, the destroyer of Vritra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)