Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.59.72-73h: मैं ही महान पाण्डवों का यह भारी भार दूर करूँगा। इस युद्ध में तीखे बाणों से घायल होने पर भी अर्जुन भीष्म के प्रति अपने अभिमान के कारण अपने कर्तव्य को नहीं समझ रहा है।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 72-73h
 
 
श्लोक  6.59.72-73h 
भारमेतं विनेष्यामि पाण्डवानां महात्मनाम्।
अर्जुनो हि शरैस्तीक्ष्णैर्वध्यमानोऽपि संयुगे॥ ७२॥
कर्तव्यं नाभिजानाति रणे भीष्मस्य गौरवात्।
 
 
अनुवाद
मैं ही महान पाण्डवों का यह भारी भार दूर करूँगा। इस युद्ध में तीखे बाणों से घायल होने पर भी अर्जुन भीष्म के प्रति अपने अभिमान के कारण अपने कर्तव्य को नहीं समझ रहा है।
 
I alone will remove this heavy burden of the great Pandavas. Arjuna, despite being hit by sharp arrows in this war, is not understanding his duty due to his pride towards Bhishma. 72 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)