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mahabharat 6.59.54: तब अर्जुन ने मेघ के समान घोर शब्द करने वाला दिव्य धनुष उठाया और तीन बाणों से भीष्म का धनुष काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.59.54 
तत: पार्थो धनुर्गृह्य दिव्यं जलदनि:स्वनम्।
पातयामास भीष्मस्य धनुश्छित्त्वा त्रिभि: शरै:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने मेघ के समान घोर शब्द करने वाला दिव्य धनुष उठाया और तीन बाणों से भीष्म का धनुष काट डाला।
 
Then Arjuna took up the divine bow which made a loud sound like that of a cloud and with three arrows cut off Bhishma's bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)