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mahabharat 6.59.52: क्षण भर में ही घोड़ों और सारथिसहित अर्जुन का रथ उस महान बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गया और किसी को दिखाई नहीं दिया॥52॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.59.52 
क्षणेन स रथस्तस्य सहय: सहसारथि:।
शरवर्षेण महता संछन्नो न प्रकाशते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
क्षण भर में ही घोड़ों और सारथिसहित अर्जुन का रथ उस महान बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गया और किसी को दिखाई नहीं दिया॥52॥
 
In a moment, Arjuna's chariot along with its horses and charioteer were covered by that great shower of arrows and could not be seen by anyone. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)