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mahabharat 6.59.49: संजय कहते हैं - हे राजन! तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के रजत-श्वेत घोड़ों को उसी दिशा में हाँक दिया, जिस ओर भीष्म का रथ था। उस रथ की ओर सूर्य के समान देखना भी कठिन था।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.59.49 
संजय उवाच
ततोऽश्वान् रजतप्रख्यान् नोदयामास माधव:।
यतो भीष्मरथो राजन् दुष्प्रेक्ष्यो रश्मिवानिव॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के रजत-श्वेत घोड़ों को उसी दिशा में हाँक दिया, जिस ओर भीष्म का रथ था। उस रथ की ओर सूर्य के समान देखना भी कठिन था।
 
Sanjaya says - O King! Then Lord Krishna drove Arjuna's silver-white horses in the same direction where Bhishma's chariot was. It was difficult to even look at that chariot like the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)