श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  6.59.47-48 
एवमुक्त: प्रत्युवाच वासुदेवं धनंजय:॥ ४७॥
नोदयाश्वान् यतो भीष्मो विगाहैतद् बलार्णवम्।
पातयिष्यामि दुर्धर्षं वृद्धं कुरुपितामहम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर अर्जुन ने उनसे इस प्रकार कहा - 'भगवन्! इन घोड़ों को वहाँ ले चलो जहाँ भीष्म उपस्थित हैं। इस सेनारूपी समुद्र में प्रवेश करो। आज मैं कुरुकुल के वृद्ध पितामह, वीर एवं पराक्रमी भीष्म को उनके रथ से नीचे गिरा दूँगा।' 47-48॥
 
When Vasudevanandan Shri Krishna said this, Arjun replied to him thus - 'Lord! Drive these horses to where Bhishma is present. Enter this ocean of army. Today I will throw down the old patriarch of Kurukula, the brave and courageous Bhishma, from his chariot. 47-48॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd