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mahabharat 6.59.37-38h: मनुष्य, हाथी और घोड़े सभी बाणों से छिद गए थे। रथों के ध्वज और कूबड़ टूटकर गिर पड़े थे। इस प्रकार पांडव सेना स्तब्ध होकर हाहाकार कर रही थी।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  6.59.37-38h 
आविद्धनरनागाश्वं पतितध्वजकूबरम्॥ ३७॥
अनीकं पाण्डुपुत्राणां हाहाभूतमचेतनम्।
 
 
अनुवाद
मनुष्य, हाथी और घोड़े सभी बाणों से छिद गए थे। रथों के ध्वज और कूबड़ टूटकर गिर पड़े थे। इस प्रकार पांडव सेना स्तब्ध होकर हाहाकार कर रही थी।
 
Men, elephants and horses were all pierced by arrows. The flags and humps of the chariots had broken and fallen down. In this way the Pandava army was in a trance and was wailing. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)