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mahabharat 6.59.34-35h: बाणों की वर्षा से क्रोधित होकर पराक्रमी पाण्डव सेना श्रीकृष्ण, अर्जुन और शिखण्डी की आँखों के सामने काँपने लगी।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.59.34-35h 
प्राकम्पत महासेना शरवर्षेण तापिता॥ ३४॥
पश्यतो वासुदेवस्य पार्थस्याथ शिखण्डिन:।
 
 
अनुवाद
बाणों की वर्षा से क्रोधित होकर पराक्रमी पाण्डव सेना श्रीकृष्ण, अर्जुन और शिखण्डी की आँखों के सामने काँपने लगी।
 
Enraged by the shower of arrows, the mighty Pandava army began to tremble before the eyes of Shri Krishna, Arjuna and Shikhandi. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)