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mahabharat 6.59.32-33h: जो भी योद्धा पुरुषों में श्रेष्ठ भीष्म के सामने आता, मैं उसे क्षण भर के लिए खड़ा हुआ देखता और फिर उसी क्षण भूमि पर गिरता हुआ देखता।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  6.59.32-33h 
यो यो भीष्मं नरव्याघ्रमभ्येति युधि कश्चन॥ ३२॥
मुहूर्तदृष्ट: स मया पतितो भुवि दृश्यते।
 
 
अनुवाद
जो भी योद्धा पुरुषों में श्रेष्ठ भीष्म के सामने आता, मैं उसे क्षण भर के लिए खड़ा हुआ देखता और फिर उसी क्षण भूमि पर गिरता हुआ देखता।
 
Whichever warrior would come in front of the greatest of men, Bhishma, I would see him standing for a moment and then falling on the ground in the same instant. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)