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mahabharat 6.59.27-28h: उस समय आपके चाचा भीष्म युद्धस्थल में अद्भुत कर्म करते हुए, अधम रूप धारण करके घूम रहे थे और पाण्डव सेना का विनाश कर रहे थे। वहाँ नाना प्रकार के लोग उनके विषय में नाना प्रकार की बातें कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  6.59.27-28h 
कुर्वाणं समरे कर्म सूदयानं च वाहिनीम्।
व्याक्रोशन्त रणे तत्र नरा बहुविधा बहु॥ २७॥
अमानुषेण रूपेण चरन्तं पितरं तव।
 
 
अनुवाद
उस समय आपके चाचा भीष्म युद्धस्थल में अद्भुत कर्म करते हुए, अधम रूप धारण करके घूम रहे थे और पाण्डव सेना का विनाश कर रहे थे। वहाँ नाना प्रकार के लोग उनके विषय में नाना प्रकार की बातें कर रहे थे।
 
At that time, your uncle Bhishma, performing amazing deeds in the battlefield, roamed around in a subhuman form and destroyed the Pandava army. There, many people of different kinds were talking about him in various ways. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)