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mahabharat 6.59.19: दूसरे सैनिक इस प्रकार चिल्ला रहे थे- 'आओ, मेरे पास आओ, क्यों डरते हो? कहाँ जाओगे? मैं रणभूमि में डटा हुआ हूँ। डरो मत'॥19॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.59.19 
अथाभ्येहित्वमागच्छ किं भीतोऽसि क्व यास्यसि।
स्थितोऽहं समरे मा भैरिति चान्ये विचुक्रुशु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
दूसरे सैनिक इस प्रकार चिल्ला रहे थे- 'आओ, मेरे पास आओ, क्यों डरते हो? कहाँ जाओगे? मैं रणभूमि में डटा हुआ हूँ। डरो मत'॥19॥
 
The other soldiers were shouting like this - 'Come, come to me, why are you scared? Where will you go? I am standing firm in the battle. Do not be afraid'॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)