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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.59.14 
न दृष्टं न श्रुतं वापि युद्धमेतादृशं नृप।
यथा तव सुतानां च पाण्डवानां च भारत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! हे राजन! उस दिन पाण्डवों और आपके पुत्रों के बीच जो भयंकर युद्ध हुआ, वह न तो पहले कभी देखा गया और न ही सुना गया।
 
Bharata! O lord of kings! The terrible battle that took place that day between the Pandavas and your sons has never been seen or heard of before. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)