श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 136-138h
 
 
श्लोक  6.59.136-138h 
श्रुतायुरम्बष्ठपतिश्च राजा
तथैव दुर्मर्षणचित्रसेनौ॥ १३६॥
द्रोण: कृप: सैन्धवबाह्लिकौ च
भूरिश्रवा: शल्यशलौ च राजन्।
अन्ये च योधा: शतश: समेता:
क्रुद्धेन पार्थेन रणस्य मध्ये॥ १३७॥
स्वबाहुवीर्येण जिता: सभीष्मा:
किरीटिना लोकमहारथेन।
 
 
अनुवाद
श्रुतायु, राजा अम्बष्ठपति, दुर्मर्षण, चित्रसेन, द्रोण, कृप, जयद्रथ, बाह्लीक, भूरिश्रवा, शल्य और शल - ये तथा अन्य सैकड़ों योद्धा भीष्म के साथ युद्धस्थल में क्रोध में भरे हुए महारथी अर्जुन द्वारा अपनी ही बाहुओं के बल से परास्त कर दिए गए हैं।। 136-137 1/2॥
 
Shrutayu, King Ambasthapati, Durmarshana, Chitrasena, Drona, Kripa, Jayadratha, Bahlik, Bhurishrava, Shalya and Shala - these and hundreds of other warriors have been defeated along with Bhishma in the battlefield by Arjuna, the great warrior of the world, filled with anger, by the might of his own arms.' 136-137 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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