Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.59.125: वह नदी बड़े वेग से बह रही थी। उसका प्रवाह प्रबल था। मरे हुए हाथियों और घोड़ों के शरीर तटों के समान प्रतीत हो रहे थे। राजाओं का मज्जा और मांस कीचड़ के समान था। अनेक राक्षस और भूत उसे पी जाते थे। 125. | mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह नदी बड़े वेग से बह रही थी। उसका प्रवाह प्रबल था। मरे हुए हाथियों और घोड़ों के शरीर तटों के समान प्रतीत हो रहे थे। राजाओं का मज्जा और मांस कीचड़ के समान था। अनेक राक्षस और भूत उसे पी जाते थे। 125.
That river was flowing with great speed. Its flow was strong. The bodies of dead elephants and horses appeared like the banks. The marrow and flesh of the kings were like mud. Many demons and ghosts used to consume it. 125.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥