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mahabharat 6.59.119: जहाँ कहीं भी गांडीव धनुष टंकारता, आपके सभी सैनिक सिर झुका लेते। किसी ने उन पर आक्रमण नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  6.59.119 
सर्वाणि सैन्यानि तु तावकानि
यतो यतो गाण्डिवज: प्रणाद:।
ततस्तत: संनतिमेव जग्मु-
र्न तं प्रतीपोऽभिससार कश्चित्॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
जहाँ कहीं भी गांडीव धनुष टंकारता, आपके सभी सैनिक सिर झुका लेते। किसी ने उन पर आक्रमण नहीं किया।
 
Wherever the Gandiva bow twirled, all your soldiers bowed their heads. No one attacked them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)