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mahabharat 6.59.116: तत्पश्चात्, रणभूमि की समस्त दिशाओं और कोनों को तीखे बाणों से आच्छादित करके, किरीटधारी अर्जुन ने गाण्डीव धनुष की टंकार द्वारा कौरवों के हृदय में महान पीड़ा उत्पन्न कर दी।   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  6.59.116 
ततो दिश: सोऽनुदिशश्च पार्थ:
शरै: सुधारै: समरे वितत्य।
गाण्डीवशब्देन मनांसि तेषां
किरीटमाली व्यथयाञ्चकार॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, रणभूमि की समस्त दिशाओं और कोनों को तीखे बाणों से आच्छादित करके, किरीटधारी अर्जुन ने गाण्डीव धनुष की टंकार द्वारा कौरवों के हृदय में महान पीड़ा उत्पन्न कर दी।
 
Thereafter, having covered all directions and corners of the battlefield with sharp arrows, the crown-wearing Arjuna caused great pain in the hearts of the Kauravas by the twirling of the Gandiva bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)