श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  6.59.115 
शिलीमुखा: पार्थधनु:प्रमुक्ता
रथान् ध्वजाग्राणि धनूंषि बाहून्।
निकृत्य देहान् विविशु: परेषां
नरेन्द्रनागेन्द्रतुरङ्गमाणाम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के धनुषसे छूटे हुए बाण शत्रुओंके रथ, ध्वजा, धनुष और भुजाओंको काटकर राजाओं, हाथियों और घोड़ोंके शरीरोंमें घुसने लगे ॥115॥
 
The arrows released from Arjuna's bow cut the chariots, flags, bows and arms of the enemies and started entering the bodies of the kings, elephants and horses. 115॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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