श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  6.59.114 
तेनोत्तमास्त्रेण ततो महात्मा
सर्वाण्यनीकानि महाधनुष्मान्।
शरौघजालैर्विमलाग्निवर्णै-
र्निवारयामास किरीटमाली॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् किरीटधारी, महामनस्वी, महाधनुर्धर अर्जुन ने उस उत्तम अस्त्र का प्रयोग करके अग्नि के समान प्रज्वलित शुद्ध बाणों का जाल बिछाकर समस्त कौरव सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया ॥114॥
 
Then the crown-wearing, great-minded, great archer Arjuna, using that excellent weapon, cast a net of pure and fire-like blazing arrows and stopped all the Kaurava troops from advancing. ॥114॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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