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mahabharat 6.59.11: बहुत से वीर पुरुषों के सिर कट गए, परन्तु उनके धड़ धनुष, बाण आदि अस्त्र-शस्त्र लिए हुए पहले जैसे ही खड़े रहे ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.59.11 
हृतोत्तमाङ्गा: केचित् तु तथैवोद्यतकार्मुका:।
प्रगृहीतायुधाश्चापि तस्थु: पुरुषसत्तमा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
बहुत से वीर पुरुषों के सिर कट गए, परन्तु उनके धड़ धनुष, बाण आदि अस्त्र-शस्त्र लिए हुए पहले जैसे ही खड़े रहे ॥11॥
 
The heads of many brave men were cut off, but their torsos remained standing as before, carrying bows, arrows and other weapons. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)