श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  6.59.107 
मृदङ्गभेरीपणवप्रणादा
नेमिस्वना दुन्दुभिनि:स्वनाश्च।
ससिंहनादाश्च बभूवुरुग्रा:
सर्वेष्वनीकेषु तत: कुरूणाम्॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कौरवों की सम्पूर्ण सेना में ढोल, मृदंग और नगाड़ों की ध्वनि गूँजने लगी। रथों के पहियों की घरघराहट सुनाई देने लगी। योद्धाओं की गर्जना के साथ मिलकर वे समस्त ध्वनियाँ अत्यंत भयंकर प्रतीत होने लगीं॥107॥
 
Thereafter the sound of drums, cymbals and drums started reverberating in the entire army of the Kauravas. The whirring sound of the wheels of the chariots could be heard. All those sounds, mixed with the roars of the warriors, seemed extremely fierce.॥ 107॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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