Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.59.105: शत्रुओं का नाश करने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने पुनः घोड़ों की लगाम संभाली और पाञ्चजन्य शंख लेकर उसकी ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान कर दिया ॥105॥ | mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तानभीषून् पुनराददान:
प्रगृह्य शङ्खं द्विषतां निहन्ता।
निनादयामास ततो दिशश्च
स पाञ्चजन्यस्य रवेण शौरि:॥ १०५॥
अनुवाद
शत्रुओं का नाश करने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने पुनः घोड़ों की लगाम संभाली और पाञ्चजन्य शंख लेकर उसकी ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान कर दिया ॥105॥
Lord Krishna, the destroyer of enemies, once again took the reins of the horses and took the Panchajanya conch and made all directions resonate with its sound. ॥105॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥