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mahabharat 6.59.104: अर्जुन की यह प्रतिज्ञा और कर्तव्य पालन का यह दृढ़ निश्चय सुनकर भगवान श्रीकृष्ण का हृदय प्रसन्न हो गया। वे कौरवश्रेष्ठ अर्जुन को प्रसन्न करने के लिए उत्सुक होकर पुनः चक्र धारण किए हुए रथ पर बैठ गए।104॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  6.59.104 
तत: प्रतिज्ञां समयं च तस्य
जनार्दन: प्रीतमना निशम्य।
स्थित: प्रिये कौरवसत्तमस्य
रथं सचक्र: पुनरारुरोह॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन की यह प्रतिज्ञा और कर्तव्य पालन का यह दृढ़ निश्चय सुनकर भगवान श्रीकृष्ण का हृदय प्रसन्न हो गया। वे कौरवश्रेष्ठ अर्जुन को प्रसन्न करने के लिए उत्सुक होकर पुनः चक्र धारण किए हुए रथ पर बैठ गए।104॥
 
Hearing this promise of Arjuna and this determination to fulfill his duty, Lord Krishna's heart became happy. Eager to please Arjun, the best of Kurus, he again sat on the chariot carrying the wheel. 104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)