श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  6.59.103 
न हास्यते कर्म यथाप्रतिज्ञं
पुत्रै: शपे केशव सोदरैश्च।
अन्तं करिष्यामि यथा कुरूणां
त्वयाहमिन्द्रानुज सम्प्रयुक्त:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
केशव! अब मैं अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार अपना कर्तव्य पालन करूँगा, उसका कभी परित्याग नहीं करूँगा। मैं अपने पुत्रों और भाइयों की शपथ लेकर कहता हूँ। उपेन्द्र! आपकी आज्ञा पाकर मैं समस्त कौरवों का वध कर दूँगा।॥103॥
 
Keshav! Now I will perform my duty as per my promise, I will never abandon it. I say this by swearing on my sons and brothers. Upendra! On getting your permission I will kill all the Kauravas.'॥103॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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