Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.59.102: जब श्रीकृष्ण खड़े हुए, तब अद्वितीय स्वर्ण हार पहने हुए अर्जुन ने अत्यन्त प्रसन्न होकर उनके चरणों में प्रणाम करके कहा - 'केशव! क्रोध त्याग दीजिए। प्रभु! आप पाण्डवों के परम आश्रय हैं।' 102. | mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब श्रीकृष्ण खड़े हुए, तब अद्वितीय स्वर्ण हार पहने हुए अर्जुन ने अत्यन्त प्रसन्न होकर उनके चरणों में प्रणाम करके कहा - 'केशव! क्रोध त्याग दीजिए। प्रभु! आप पाण्डवों के परम आश्रय हैं।' 102.
When Shri Krishna stood up, Arjuna, wearing a unique golden necklace, was very pleased and bowed down to his feet and said - 'Keshav! Stop your anger. Lord! You are the ultimate refuge of the Pandavas. 102.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥