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mahabharat 6.59.1-2: धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! उस घोर युद्ध में जब भीष्म ने मेरे अत्यन्त दुःखी पुत्र को क्रोधित करने की प्रतिज्ञा की थी, तब उन्होंने उस रणभूमि में पाण्डवों के साथ क्या किया? और पांचाल योद्धाओं ने पितामह भीष्म के साथ क्या किया?॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 6.59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 59: भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना, अर्जुनकी प्रतिज्ञा और उनके द्वारा कौरव-सेनाकी पराजय, तृतीय दिवसके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.59.1-2 
धृतराष्ट्र उवाच
प्रतिज्ञाते ततस्तस्मिन् युद्धे भीष्मेण दारुणे।
क्रोधितो मम पुत्रेण दु:खितेन विशेषत:॥ १॥
भीष्म: किमकरोत् तत्र पाण्डवेयेषु संयुगे।
पितामहे वा पञ्चालास्तन्ममाचक्ष्व संजय॥ २॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! उस घोर युद्ध में जब भीष्म ने मेरे अत्यन्त दुःखी पुत्र को क्रोधित करने की प्रतिज्ञा की थी, तब उन्होंने उस रणभूमि में पाण्डवों के साथ क्या किया? और पांचाल योद्धाओं ने पितामह भीष्म के साथ क्या किया?॥1-2॥
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! In that terrible war, when Bhishma had vowed to anger my particularly distressed son, then what did he do to the Pandavas on that battlefield? And what did the Panchala warriors do to Grandfather Bhishma?॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)