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mahabharat 6.58.9: तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले सात्यकि उस समय हुए भयंकर युद्ध में अपना टूटा हुआ रथ छोड़कर तुरंत ही अभिमन्यु के रथ पर बैठ गये।   |   mahabharat अध्याय 6.58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.58.9 
सात्यकिस्तु रथं त्यक्त्वा वर्तमाने भयावहे।
अभिमन्यो रथं तूर्णमारुरोह परंतप:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले सात्यकि उस समय हुए भयंकर युद्ध में अपना टूटा हुआ रथ छोड़कर तुरंत ही अभिमन्यु के रथ पर बैठ गये।
 
Then Satyaki, that tormentor of enemies, abandoning his broken chariot in the fierce battle that was then raging, immediately sat on Abhimanyu's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)