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mahabharat 6.58.44: आज सबके सामने मैं अकेला ही सेना और बन्धु-बान्धवों सहित समस्त पाण्डवों को आगे बढ़ने से रोक दूँगा।॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 6.58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.58.44 
अद्य पाण्डुसुतानेक: ससैन्यान् सह बन्धुभि:।
सोऽहं निवारयिष्यामि सर्वलोकस्य पश्यत:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
आज सबके सामने मैं अकेला ही सेना और बन्धु-बान्धवों सहित समस्त पाण्डवों को आगे बढ़ने से रोक दूँगा।॥ 44॥
 
Today, in front of everyone, I alone will stop all the Pandavas, including their army and relatives, from advancing further.'॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)