vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद
»
श्लोक 4-5h
श्लोक
6.58.4-5h
शस्त्राणामथ तां वृष्टिं शलभानामिवायतिम्॥ ४॥
रुरोध सर्वत: पार्थ: शरै: कनकभूषणै:।
अनुवाद
पतंगों की श्रृंखला के समान उस अस्त्र-शस्त्र-वर्षा को अर्जुन ने अपने सुवर्ण-जटित बाणों द्वारा सब ओर से रोक दिया।
That shower of weapons, like a series of moths, was stopped from all sides by Arjuna with his gold-decorated arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×