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mahabharat 6.58.38: महाराज! यदि आपको पाण्डवों पर दया करनी ही थी तो युद्ध आरम्भ होने से पहले ही मुझे बता देना चाहिए था कि मैं युद्धभूमि में पाण्डुपुत्रों, धृष्टद्युम्न तथा सात्यकि के साथ भी युद्ध नहीं करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 6.58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.58.38 
सोऽस्मि वाच्यस्त्वया राजन् पूर्वमेव समागमे।
न योत्स्ये पाण्डवान् संख्ये नापि पार्षतसात्यकी॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यदि आपको पाण्डवों पर दया करनी ही थी तो युद्ध आरम्भ होने से पहले ही मुझे बता देना चाहिए था कि मैं युद्धभूमि में पाण्डुपुत्रों, धृष्टद्युम्न तथा सात्यकि के साथ भी युद्ध नहीं करूँगा।
 
Maharaj! If you had to show mercy to the Pandavas then you should have told me before the war began that I will not fight with the sons of Pandu, Dhrishtadyumna and even Satyaki on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)