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श्लोक  6.58.37 
अनुग्राह्या: पाण्डुसुतास्तव नूनं पितामह।
यथेमां क्षमसे वीर वध्यमानां वरूथिनीम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वीर पितामह! पाण्डव निश्चय ही आपकी कृपा के पात्र हैं, इसीलिए मेरी सेना का संहार हो रहा है और आप चुपचाप यह दुःख सहन कर रहे हैं।
 
Valiant grandfather! The Pandavas are certainly the recipients of your kindness, that is why my army is being slaughtered and you are silently enduring this misery.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)