श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.58.32 
पुनरावर्ततां तेषां वेग आसीद् विशाम्पते।
पूर्यत: सागरस्येव चन्द्रस्योदयनं प्रति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! लौटते हुए उन योद्धाओं का महान वेग चन्द्रोदय के समय उमड़ते हुए समुद्र के समान प्रतीत हो रहा था।
 
O King! The great speed of those warriors returning back seemed like the rising ocean at the time of moonrise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)