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mahabharat 6.58.3-4h: वे क्रोध में भरकर रणभूमि में अर्जुन के रथ पर चमकते हुए तेज, भारी गदा, परिघ, भाला, फरसा, मुद्गर और मूसल आदि अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे। 3 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.58.3-4h 
शक्तीश्च विमलास्तीक्ष्णा गदाश्च परिघै: सह।
प्रासान् परश्वधांश्चैव मुद्‍गरान् मुसलानपि॥ ३॥
चिक्षिपु: समरे क्रुद्धा: फाल्गुनस्य रथं प्रति।
 
 
अनुवाद
वे क्रोध में भरकर रणभूमि में अर्जुन के रथ पर चमकते हुए तेज, भारी गदा, परिघ, भाला, फरसा, मुद्गर और मूसल आदि अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे। 3 1/2॥
 
Filled with anger, they started showering weapons like shining power, heavy mace, parigha, spear, axe, mudgar and pestle etc. on Arjuna's chariot in the battle. 3 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)