श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.58.27 
वध्यमानं ततस्तत्र शरै: पार्थस्य संयुगे।
दुद्राव कौरवं सैन्यं विषादभयकम्पितम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर युद्धस्थल में पार्थ के बाणों से पीड़ित हुई कौरव सेना शोक और भय से काँपती हुई इधर-उधर भागने लगी।
 
Then the Kaurava army, afflicted by Partha's arrows on the battlefield, fled here and there, trembling with grief and fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)