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mahabharat 6.58.23-24: दूसरी ओर, जब हजारों रथी इधर-उधर भाग रहे थे, तब एक रथ पर बैठे हुए अभिमन्यु और सात्यकि ने युद्धस्थल में सुबलपुत्र की सेना को सब ओर से नष्ट करना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.58.23-24 
ततो रथसहस्रेषु विद्रवत्सु ततस्तत:॥ २३॥
तावास्थितावेकरथं सौभद्रशिनिपुङ्गवौ।
सौबलीं समरे सेनां शातयेतां समन्तत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, जब हजारों रथी इधर-उधर भाग रहे थे, तब एक रथ पर बैठे हुए अभिमन्यु और सात्यकि ने युद्धस्थल में सुबलपुत्र की सेना को सब ओर से नष्ट करना आरम्भ कर दिया।
 
On the other hand, while thousands of charioteers were fleeing here and there, Abhimanyu and Satyaki, seated on one chariot, began destroying Subala's son's army from all sides in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)