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mahabharat 6.58.11: इसी प्रकार एक ओर से आकर युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाले द्रोणाचार्य और भीष्म ने कंक पक्षी के पंख लगे तीखे बाणों द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर की सेना का विनाश करना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 58: पाण्डव-वीरोंका पराक्रम, कौरव-सेनामें भगदड़ तथा दुर्योधन और भीष्मका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.58.11 
द्रोणभीष्मौ रणे यत्तौ धर्मराजस्य वाहिनीम्।
नाशयेतां शरैस्तीक्ष्णै: कङ्कपत्रपरिच्छदै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार एक ओर से आकर युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाले द्रोणाचार्य और भीष्म ने कंक पक्षी के पंख लगे तीखे बाणों द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर की सेना का विनाश करना आरम्भ कर दिया।
 
Similarly, coming from one side, Dronacharya and Bhishma, who were always prepared for the war, began destroying the army of Dharmaraja Yudhishthira with sharp arrows fitted with the feathers of the Kanka bird.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)