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mahabharat 6.57.18: हे राजन! उस युद्धस्थल में एक सारथी हाथी के सवार से भिड़ जाता और सवार तथा हाथी दोनों को मार डालता। उसी प्रकार हाथी का सवार भी रथियों में सबसे वीर को मार डालता।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 6.57: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 57: उभय पक्षकी सेनाओंका घमासान युद्ध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.57.18 
रथी च समरे राजन्नासाद्य गजयूथपम्।
सगजं पातयामास गजी स रथिनां वरम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस युद्धस्थल में एक सारथी हाथी के सवार से भिड़ जाता और सवार तथा हाथी दोनों को मार डालता। उसी प्रकार हाथी का सवार भी रथियों में सबसे वीर को मार डालता।॥18॥
 
O King! In that battle-field a charioteer would clash with an elephant rider and kill both the rider and the elephant. In the same way the elephant rider would also kill the bravest of the charioteers.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)