Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.56.21-22: भारत! रथों के दौड़ने और एक-दूसरे पर आक्रमण करने की ध्वनि, नगाड़ों की ध्वनि के साथ मिलकर और भी भयानक हो गई। आपके और पांडवों के बीच हुए भीषण युद्ध में, वीर योद्धाओं के एक-दूसरे पर आक्रमण और प्रत्युत्तर करने की भयानक ध्वनि आकाश में गूँज रही थी। | mahabharat अध्याय 6.56: तीसरे दिन—कौरव-पाण्डवोंकी व्यूह-रचना तथा युद्धका आरम्भ । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धावतां च रथौघानां निघ्नतां च पृथक् पृथक्॥ २१॥
बभूव तुमुल: शब्दो विमिश्रो दुन्दुभिस्वनै:।
दिवस्पृङ् नरवीराणां निघ्नतामितरेतरम्।
सम्प्रहारे सुतुमुले तव तेषां च भारत॥ २२॥
अनुवाद
भारत! रथों के दौड़ने और एक-दूसरे पर आक्रमण करने की ध्वनि, नगाड़ों की ध्वनि के साथ मिलकर और भी भयानक हो गई। आपके और पांडवों के बीच हुए भीषण युद्ध में, वीर योद्धाओं के एक-दूसरे पर आक्रमण और प्रत्युत्तर करने की भयानक ध्वनि आकाश में गूँज रही थी।
Bhaarat! The sound of the chariots running and attacking each other became more terrifying when they mingled with the sound of the drums. The terrifying sound of the valiant men attacking and counterattacking each other in the fierce battle between you and the Pandavas was pervading the sky.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि तृतीये युद्धदिवसे परस्परव्यूहरचनायां षट्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें तीसरे दिनके युद्धमें परस्पर व्यूह-रचनाविषयक छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥