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mahabharat 6.56.20-21h: हे प्रजानाथ! सर्वत्र घोड़ों और रथों के समूह एक दूसरे पर टूटते और आक्रमण करते हुए दिखाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.56: तीसरे दिन—कौरव-पाण्डवोंकी व्यूह-रचना तथा युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 56: तीसरे दिन—कौरव-पाण्डवोंकी व्यूह-रचना तथा युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.56.20-21h 
हयौघाश्च रथौघाश्च तत्र तत्र विशाम्पते॥ २०॥
सम्पतन्तो व्यदृश्यन्त निघ्नन्तस्ते परस्परम्।
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! सर्वत्र घोड़ों और रथों के समूह एक दूसरे पर टूटते और आक्रमण करते हुए दिखाई दे रहे थे।
 
O Prajanath! Everywhere, multitudes of horses and chariots were seen breaking and attacking each other. 20 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)